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यह पुस्तक "विधायिका और मीडिया" भारतीय लोकतंत्र के दो सशक्त स्तंभों-संसद और मीडिया-के बीच जटिल संबंधों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है। लेखक ने विधायी प्रक्रिया, जनप्रतिनिधियों की भूमिका, मीडिया की स्वतंत्रता, जिम्मेदारियों और प्रभावों को सरल एवं तथ्यात्मक ढंग से समझाया है। पुस्तक बताती है कि कैसे मीडिया जनमत निर्माण करता है और विधायिका की जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहायक बनता है। साथ ही, यह सनसनीखेज़ी, पक्षपात और नैतिक चुनौतियों पर भी प्रकाश डालती है। लोकतंत्र, राजनीति और पत्रकारिता में रुचि…
  • Leidėjas:
  • Metai: 2026
  • Puslapiai: 126
  • ISBN-10: 9364315618
  • ISBN-13: 9789364315616
  • Formatas: 14 x 21.6 x 0.7 cm, minkšti viršeliai
  • Kalba: Anglų

Vidhayika Aur Media (el. knyga) (skaityta knyga) | Milind Ronghe | knygos.lt

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Aprašymas

यह पुस्तक "विधायिका और मीडिया" भारतीय लोकतंत्र के दो सशक्त स्तंभों-संसद और मीडिया-के बीच जटिल संबंधों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है। लेखक ने विधायी प्रक्रिया, जनप्रतिनिधियों की भूमिका, मीडिया की स्वतंत्रता, जिम्मेदारियों और प्रभावों को सरल एवं तथ्यात्मक ढंग से समझाया है। पुस्तक बताती है कि कैसे मीडिया जनमत निर्माण करता है और विधायिका की जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहायक बनता है। साथ ही, यह सनसनीखेज़ी, पक्षपात और नैतिक चुनौतियों पर भी प्रकाश डालती है। लोकतंत्र, राजनीति और पत्रकारिता में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी और विचारोत्तेजक है।

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  • Autorius: Milind Ronghe
  • Leidėjas:
  • Metai: 2026
  • Puslapiai: 126
  • ISBN-10: 9364315618
  • ISBN-13: 9789364315616
  • Formatas: 14 x 21.6 x 0.7 cm, minkšti viršeliai
  • Kalba: Anglų

यह पुस्तक "विधायिका और मीडिया" भारतीय लोकतंत्र के दो सशक्त स्तंभों-संसद और मीडिया-के बीच जटिल संबंधों का गहन विश्लेषण प्रस्तुत करती है। लेखक ने विधायी प्रक्रिया, जनप्रतिनिधियों की भूमिका, मीडिया की स्वतंत्रता, जिम्मेदारियों और प्रभावों को सरल एवं तथ्यात्मक ढंग से समझाया है। पुस्तक बताती है कि कैसे मीडिया जनमत निर्माण करता है और विधायिका की जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहायक बनता है। साथ ही, यह सनसनीखेज़ी, पक्षपात और नैतिक चुनौतियों पर भी प्रकाश डालती है। लोकतंत्र, राजनीति और पत्रकारिता में रुचि रखने वाले पाठकों के लिए यह पुस्तक अत्यंत उपयोगी और विचारोत्तेजक है।

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